Bitcoin ने 50,000 डॉलर के स्तर को छुआ, अगर बिटकॉइन की कीमत गिरी तो क्या दुनियाभर की अर्थव्यवस्था हो जाएगी नष्ट!

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दुनिया की सबसे महंगी करेंसी बन चुका है बिटकॉइन (Bitcoin) एक क्रिप्टोकरेंसी (CryptoCurrency) है. इस क्रिप्टोकरेंसी में पिछले दिनों ऑटो कंपनी टेस्ला के मालिक एलन मस्क (Elon Musk) ने बिटकॉइन में 1.5 बिलियन डॉलर इन्वेस्ट किए हैं। इतना ही नहीं कंपनी ने यह भी कहा कि वह आने वाले कुछ समय में अपनी कारों की कीमत के तौर पर बिटकॉइन स्वीकार करने की योजना बना रही है। इस घोषणा के कई पहलू हैं। इनमें सबसे बड़ा है बिटकॉइन को मिलने वाली मान्यता। अभी साल भर पहले तक दुनिया भर में बिटकॉइन को प्रतिबंधित करने की मांग हो रही थी और भारत में तो अब भी ऐसी खबरें आ रही हैं कि सरकार इसे प्रतिबंधित करने के लिए कानून लाने जा रही है। ऐसे वक्त टेस्ला का बिटकॉइन में भरोसा जताना ऐसी खबर है, जिसने इस क्रिप्टोकरेंसी के निवेशकों को उत्साह से भर दिया है।

आपको बता दें कि इस वक्त दुनियाभर में ब्याज दरें अपने न्यूनतम स्तर पर चल रही हैं। अमेरिका और जापान में तो यह शून्य के करीब है। दूसरे देशों में भी यह कई वर्षों के निचले स्तर पर है, और इसमें आने वाले 3-4 वर्षों तक सुधार की कोई संभावना भी नहीं दिख रही है। ऐसे में कंपनियां निवेश के लिए नए ठिकाने खोजने में लगी हैं। टेस्ला ने अपने कुल कैश रिजर्व का 8% बिटकॉइन में निवेश किया है। लेकिन कई दूसरी बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियां भी बिटकॉइन में निवेश करने की सोच रही हैं। ट्विटर के फाइनेंस डायरेक्टर नेड सेगल ने भी संकेत दिए हैं कि उनकी कंपनी बिटकॉइन में निवेश पर विचार कर रही है।

किसी भी तरह का निवेश करना सरल है चाहे वह शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड में हो या बिटकॉइन जैसी किसी क्रिप्टोकरंसी में हो इसे खेल नहीं समझना चाहिए. बाजार में सफल होने का कोई फॉर्मूला या शॉर्ट-कट नहीं है. आधुनिक अर्थव्यवस्था ने किसी एक एसेट क्लास के लिए निवेशकों का पागलपन कई बार देखा है और इतिहास गवाह है कि ऐसे हर पागलपन का अंत विनाश से ही हुआ है, चाहे वह शेयर बाजार में 2000 का डॉट कॉम बूम हो, अमेरिका में 2008 का सब-प्राइम संकट या फिर भारत में रियल एस्टेट बाजार हो अगर आप निवेश करने से पहले उसके बारे में अध्ययन नहीं करते हैं तो वह एक प्रकार का जुआ ही है।

बिटकॉइन की शुरुआत 2009 में हुई थी. शुरुआती कुछ सालों में ये करेंसी धीरे-धीरे बढ़ रही थी. लेकिन अप्रैल 2011 में बिटकॉइन की कीमत 1 डॉलर हो चुकी थी। तीन महीने बाद जून 2011 में एक बिटकॉइन की कीमत 32 डॉलर पहुंच गई, यानी 3 महीने में 3100% का उछाल। नवंबर 2011 में यह एक बार फिर 2 डॉलर पर था। वर्ष 2013 के एक ही साल में बिटकॉइन में दो-दो बूम-बर्स्ट साइकल दिख गया। जहां साल की शुरुआत 13.40 डॉलर से हुई, लेकिन अप्रैल आते-आते यह वैल्यू बढ़कर 220 डॉलर पहुंच गई। फिर महीने बाद ही अप्रैल के मध्य तक यह 70 डॉलर पर था। इसी साल अक्टूबर की शुरुआत में यह 123 डॉलर पर था और दिसंबर तक इसकी कीमत 1150 डॉलर तक पहुंच गई थी। महज़ तीन दिनों में यह 1156 डॉलर के उच्चतम स्तर से फिसल कर 760 डॉलर आया और 2015 की शुरुआत तक एक बार फिर यह 315 डॉलर पर था। यह कहानी 2020 होते हुए 2021 तक इसी तरह चल रही है, जब मार्च 2020 में एक बिटॉइन के बदले 4000 डॉलर मिल रहे थे और आज यह 48000 डॉलर तक पहुंच चुका है इतना ही नहीं 16 फरवरी को बिटकॉइन ने $50,000 के स्तर को छू लिया है. ये बिटकॉइन का अब तक का सर्वोच्च स्तर है। कई बिटकॉइन विशेषज्ञों का कहना है कि 2021 के आखिर तक इसके 1 लाख और 2 लाख डॉलर तक पहुंचने की संभावनाएं हैं। बता दें, निवेश की दुनिया का एक अटल नियम है – जो चढ़ता है, वह गिरता है। बिटकॉइन की कीमत जिस तेजी से बड़ी है उस तेजी से गिर भी सकती है और कई बार गिरी भी है जिस प्रकार बड़ी बड़ी कंपनीयां बिटकॉइन में निवेश कर रही हैं अगर वो कंपनियों बिटकॉइन से अपना पैसा निकाल लेती हैं उस स्थिति में बिटकॉइन की कीमत गिरने की पूरी-पूरी संभावनाएं हैं। बिटकॉइन में कई छोटी-बड़ी कंपनियों का पैसा लगा हुआ है बड़े निवेशकों का बिटकॉइन से पैसा निकालने के बाद अगर बिटकॉइन की कीमत गिरती है तो उस स्थिति में बहुत सी कंपनियों का नुकसान होगा जिसका असर दुनियाभर की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

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