मोतीलाल ओसवाल एसेट मैनेजमेंट कंपनी ने लॉन्च की दो नई म्यूचुअल फंड स्कीम, स्‍ट्रैटेजिक रीबैलेंसिंग की फिलॉसफी फॉलो करेंगे ये फंड…

Mutual Fund

भारतीयों के लिए शुरु से ही बैंक फिक्‍स्‍ड डिपॉजिट (FD) निवेश का पसंदीदा विकल्‍प रहा है. हालांकि, अब स्थिति बदल रही है. घटती ब्‍याज दरों के साथ इसकी लोकप्रियता कम होती जा रही है. खासतौर से पिछले एक साल के दौरान फिक्‍स्‍ड डिपॉजिट की दरों में काफी गिरावट आई है. ऐसे समय में कम जोखिम वाले निवेश विकल्‍पों में पैसा लगाने के इच्‍छुक लोगों के लिए म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) एक बेहतर विकल्‍प है. इसी बीच मोतीलाल ओसवाल एसेट मैनेजमेंट कंपनी ने दो नई स्‍कीमें लॉन्‍च की हैं जो निवेशकों के लिए काफी लाभकारी साबित हो सकती हैं।

आपको बता दें कि मोतीलाल ओसवाल एसेट मैनेजमेंट कंपनी की पहली स्‍कीम का नाम (Motilal Oswal Asset Allocation Passive Fund of Fund – Aggressive) है और दूसरी स्‍कीम का नाम (Motilal Oswal Asset Allocation Passive Fund of Fund – Conservative) है. लोगों के लिए बैंक फिक्‍स्‍ड डिपॉजिट निवेश का पसंदीदा विकल्‍प जरूर रहा है लेकिन आमदनी का अच्‍छा जरिया नहीं हैं. पहले लोग रेगुलर इनकम हासिल करने के लिए और खासतौर से रिटायरमेंट के बाद के दिनों के लिए बैंक (FD) या (RD) कराया करते थे।

जो लोग रिटायरमेंट के बाद के दिनों के लिए फाइनेंशियल प्लानिंग (Financial Planning) कर रहे हैं उनके लिए इक्विटी म्‍यूचुअल फंड एक बेहतर विकल्‍प है. ऐसे में अगर आप भी पैसा लगाने की सोच रहे हैं तो हम आपको बताते हैं मोतीलाल ओसवाल एसेट मैनेजमेंट कंपनी की दो नए फंड के बारे में जो आपके बेहतर साबित हो सकते हैं. इनका नाम है मोतीलाल ओसवाल एसेट एलोकेशन पैसिव फंड ऑफ फंड – एग्रेसिव और मोतीलाल ओसवाल एसेट एलोकेशन पैसिव फंड ऑफ फंड – कंजर्वेटिव है. ये दोनों फंड ऑफ फंड (एफओएफ) कंपनी के डिजिटल पार्टनर ग्रो एप पर भी उपलब्‍ध है।

मोतीलाल ओसवाल एसेट मैनेजमेंट कंपनी का कहना है कि आज बाजार में निवेश के हजारों विकल्‍प मौजूद हैं. हमें लगता है कि यह एकमात्र फंड निवेशकों की जरूरत के लिए पर्याप्‍त है. कंपनी ने बाजार के मौंजूदा हालात को देखते हुए ये दो फंड लौंच किए हैं इस वक्त शेयर बाजार अपने शिखर पर हैं. डेट यील्‍ड निचले स्‍तरों पर हैं. गोल्‍ड (Gold) 2020 में सबसे अच्‍छा प्रदर्शन करने वाला एसेट साबित हुआ है. ऐसे माहौल में हमारा मानना है कि कम जोखिम के साथ अच्‍छे रिटर्न पाने के लिए निवेश का सबसे अच्‍छा तरीका अलग-अलग एसेट्स में पैसा लगाना है।

आपको बता दें कि ये स्‍कीमें 100 फीसदी पैसिव मल्‍टी एसेट एफओएफ हैं. इनका इक्विटी, इंटरनेशल इक्विटी, फिक्‍स्‍ड इनकम और कमोडिटी में निवेश किया जाएगा. यह फंड निवेशकों को अपनी जोखिम क्षमता या निवेश लक्ष्‍यों के अनुसार अलग-अलग तरह के एसेट्स में निवेश करने का मौका देगा. बता दें, फंड ऑफ फंड यानी एफओएफ म्यूचुअल फंड की ऐसी स्कीमें होती हैं जो दूसरी स्कीमों में निवेश करती हैं. ये म्‍यूचुअल फंड स्‍कीमें फंड हाउस की अपनी या किसी दूसरे फंड हाउस की हो सकती हैं. इस फंड को लेकर फंड हाउस का कहना है कि ये फंड निवेश में स्‍ट्रैटेजिक रीबैलेंसिंग की फिलॉसफी फॉलो करेंगे. इससे मार्केट की टाइमिंग का जोखिम खत्‍म होगा. इसमें फंड मैनेजर रिस्‍क या क्रेडिट रिस्‍क नहीं जुड़ा हैै।

अगर एक्टिव फंड और पैसिव फंड की बात करें तो एक्सपर्ट्स का कहना है कि एक्टिव फंड और पैसिव फंड में अंतर करना आसान हैं. फंड मैनेजर्स, एक्टिव फंड को मैनेज करते हैं. एक्टिव फंड में रिबैलेंसिंग की जरूरत होती है जबकि पैसिव फंड में इंडेक्स की तरह काम करते हैं. अगर रिटर्न के आधार पर इन दोनों ही फंड्स के फर्क को समझना हो तो पैसिव फंड पर रिटर्न इंडेक्स जैसे ही मिलते है. एक्टिव फंड बेंचमार्क से बेहतर रिटर्न दे सकते हैं. निवेश के लिए रिस्क क्षमता होनी चाहिए. दोनों कैटेगरी के फंड में रिस्क रहता है. इसलिए लंबी अवधि में निवेश के लिए पैसिव फंड बेहतर विकल्प होता हैै।

आपको बता दें कि एक्टिव फंड में निवेश पर 2.25-2.50 फीसदी चार्ज लगता है जबकि पैसिव फंड में निवेश पर 0.50-0.75 फीसदी चार्ज लगता है.मौजूदा नियमों के अनुसार दोनों एफओएफ पर डेट इंस्‍ट्रूमेंट की तरह टैक्‍स लगेगा. इन फंडों को होल्‍ड करने वाले लंबी अवधि के निवेशक इंडेक्‍सेशन बेनिफिट क्‍लेम कर सकते हैं।

Spread the love

Leave a Reply